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Vertigo Treatment In Rajasthan | Mahavir ENT Hospital

Vertigo Dizziness: Causes, Symptoms, and Treatment – In Hindi

आपने कभी न कभी महसूस किया ही होगा कि अचानक से आपकी आंखों के आगे अंधेरा-सा छा गया हो, फिर चाहे आप बैठे हों या खड़े हों। साथ ही कभी न कभी आपको ऐसा भी लगा होगा कि अचानक आपका सिर घूमने लगा है। अगर हां, तो यह चक्कर आने के लक्षण हैं।

वर्टिगो का अर्थ है, घूमना या चक्कर आना। वर्टिगो में लोगो को बहुत चक्कर आता है। मस्तिष्क में बहुत पीड़ा होती है या असंतुलन बना रहता है। इस असंतुलन के समय पीड़ित व्यक्ति को अधिक पसीने आना अथवा जी मचलना, उल्टी आना इत्यादि होता है। वर्टिगो के दौरान पीड़ित व्यक्ति बहुत अधिक कमजोरी महसूस करने लगता है। कुछ लोगो को ऊंचाई से बहुत डर लगता है और अधिक ऊंचाई पर जाने उनका सिर चक्कराने लगता है।

वर्टिगो किसी को भी हो सकता है इसके लिए कोई आयु सीमित नहीं है खासतौर पर बुजुर्गों में 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगो में वर्टिगो आम बात है। डिजिनेस और वर्टिगो सभी छेत्र के चिकिस्तको के लिए सामान्य शिकायत है। 15 %से 40 % लोग अपने जीवन के किसी भी क्षण वर्टिगो और डिजिनेस से पीड़ित होते है।


वर्टिगो क्या है ? (What is Vertigo in Hindi)

वर्टिगो चक्कर आने से मस्तिष्क घूमने लगता है व आंखो के सामने अंधेरा सा छा जाता है। कुछ नजर नहीं आता है और सारी धरती मानो घूम रही होती है। यह अकसर तब होता है जब शरीर में रक्त की पूर्ति कम होती है रक्तचाप की अचानक कमी होने से वर्टिगो की स्तिथि बन जाती है। जिससे चक्कर आने लगता है। वर्टिगो के प्रभाव से लोगो को काम करने में समस्या उत्पन्न होती है क्योंकि रोजमर्रा की जिंदगी में लोगो को काम की बहुत चिंता रहती है और अधिक चिंता करने से मस्तिष्क प्रभावित होता है। जिससे वर्टिगो अटैक भी होता है। वर्टिगो अटैक कभी भी आ सकता है, चिकिस्तको के अनुसार वर्टिगो अटैक लंबे समय तक रहता व थोड़ी देर भी रह सकता है। मस्तिष्क रोगी व्यक्तियो को वर्टिगो अधिक प्रभावित करता है।

वर्टिगो के कारण क्या है? (What are The Causes of Vertigo in Hindi)

वर्टिगो बहुत सी बीमारियों को उभारने का काम करता है वर्टिगो के कारण आंतरिक कान में असंतुलन होता है। यह समस्या मस्तिष्क की बीमारियों के कारण होता है।

👉अचानक से बैठने या उठने पर
👉माइग्रेन के कारण
👉दवाओं के कारण
👉ब्लड प्रेशर का अचानक लो होना
👉डिहाइड्रेशन
👉मोशन सिकनेस के कारण
👉बढ़ती उम्र के कारण

  • BPPV :- BPPV के चक्कर आमतौर पर सोने व् करवट बदलने पर आते है इसमें कान की शिराओ में कैल्शियम कार्बोनेट का कचरा जमा हो जाता है। बुजुर्गो रोगियों में BPPV कारण अत्यधिक होता है क्योकि सिर पर चोट लगने से वह बिस्तर पर ही होते है जिससे उनके कान के भीतर संक्रमण होने लगता है।
  • मेनियार्स :– मेनियार्स का रोग कान के भीतरी भाग में होता है, यह सुनने की शक्ति को प्रभावित करता है व आवाजे आती है जिसके कारण कुछ घंटो में चक्कर आने की संभावना होती हैं। यह कान के भीतर बहने वाले तरलपदार्थो के कारण होता है।
  • वेस्टीब्यूलर माइग्रेन :– वेस्टीब्यूलर माइग्रेन के कारण सामान्य है। चक्कर आना, सिर में दर्द होना यह सामान्य लक्षण सभी वर्ग के लोगो में होना आम बात है। यह एक दूसरे से जुड़े रहते अथवा स्वतंत्र होते है। इन रोगियों के सुनवाई की समस्या नहीं होती है। वह अक्सर तेज रोशनी और आवाज को सेहन नहीं कर पाते है।
  • लेब्रिथीनाइटिस :- यह रोग शरीर में संतुलन नस के जीवाणु संक्रमण का कारण होता है। जिससे एक कान में अधिक और दूसरे कान में बहरापन आ जाता है।

वर्टिगो के लक्षण क्या है? (What are The Symptom of Vertigo in Hindi)

👉अस्थिर या असंतुलित मह्सुस करना।
👉उच्चाई से डरना।
👉कम सुनाई देना।
👉गिरने का एहसास होना।
👉अधिक आवाज आने से सिरदर्द होना।
👉चक्कर आना।
👉चलने में असुविधा होना।
👉किसी भी चीज को पास आते या फिर दूर जाते हुए महसूस करना।
👉बेहोश होने जैसा महसूस होना।
👉इसके अन्य लक्षणों में सिरदर्द भी शामिल है।
👉मतली और उल्टी महसूस करना।
👉कान के अंदर बिना किसी शोर के आवाज का सुनाई देना
👉सुनने में कठिनाई महसूस होना।
👉कोई चौंका देने वाला झटका महसूस होना।

वर्टिगो का इलाज क्या है? (What are The Treatment for Vertigo in Hindi)

  • सामान्य वर्टिगो को इलाज की जरूरत नहीं पड़ती है यह अपने आप ही ठीक हो जाता है। जिन्हे गंभीर रूप से वर्टिगो की शिकायत होती है उन्हे डॉक्टर जीवाणु संक्रमण को कम करने के लिए एंटीबायोटिक जैसी कुछ दवाइया देते हैं।
  • मोशन सिकनेस और जी मिचलाने व की समस्या को दूर करने के लिए डॉक्टर एंटी- इमिटिक्स या एंटी-हिस्टामाइन जैसे दवाओं की सलाह देते है।
  • वेस्टिब्युलट परोक्सिमिया यह हड्डी के अंदर संतुलन की नस के दबाव के कारण होता है। इसका इलाज डॉक्टर स्पान्टेनियस न्यासिटमग्स विद हायपरवेंटिलेशन के द्वारा करते है। यह इलाज करने से हड्डी के अंदर संतुलन नस के दबाव को मुक्त किया जाता है।
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